एक कॉलेज में फिलोसफी की क्लास चली थी जहाँ क्लास में इस बात पर वाद विवाद चला था कि भगवान का अस्तित्व है या नहीं? !

तो प्रोफेसर ने इस बात पर ये तर्क दिए:!

क्या क्लास में कोई ऐसा है जिसने कभी भगवान को सुना है?!

किसी ने कुछ नहीं कहा! क्या किसी ने कभी भगवान को छुआ है?!

फिर से सभी चुप रहे क्या क्लास में कोई ऐसा है जिसने भगवान को देखा है?!

तीसरी बार जब किसी ने भी कोई जवाब नहीं दिया तो प्रोफेसर ने कहा इसका सीधा मतलब है कि भगवान है ही नहीं!!

क्लास में स्टुडेंट को ये बात बिलकुल अच्छी नहीं लगी और उन्होंने कुछ बोलने कि इजाजत मांगी प्रोफेसर ने इजाजत दे दी तो एक स्टुडेंट खड़ा हुआ और अपने सहपाठियों से ये प्रश्न पूछे!!

क्या क्लास में कोई ऐसा है जिसने प्रोफेसर का दिमाग देखा है?!

सारी क्लास चुप रही! क्या किसी ने प्रोफेसर के दिमाग छुआ है?!

क्लास एकदम चुप! क्या किसी ने प्रोफेसर के दिमाग को सुना है? !

जब क्लास में किसी को बोलने का साहस नहीं हुआ तो सभी एक साथ बोल पड़े प्रोफेसर का जो तर्क भगवान के अस्तित्व के प्रति है उस हिसाब से ये बात बिलकुल सच है कि हमारे प्रोफेसर के पास दिमाग नहीं है!

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